दूसरों के लिए लिहाज़ दिखाइए—भाग २
तर्कसंगत रूप से जितना संभव हो, हम अपने समुदाय में रहनेवाले लोगों के साथ एक अच्छा सम्बन्ध बनाए रखना चाहते हैं। यह माँग करता है कि हम उनके अधिकारों और भावनाओं के लिए लिहाज़ और आदर दिखाएँ।
२ यहोवा के गवाह शिष्टाचार के लिए जाने जाते हैं। आस-पड़ोस, स्कूल, और कार्यस्थल में, साथ ही साथ हमारे सम्मेलनों में, हमारी मर्यादा के स्तर अनेक प्रशंसनीय टिप्पणियों के विषय रहे हैं।—जून १५, १९८९ की वॉचटावर का पृष्ठ २० देखिए।
३ निश्चय ही, अच्छा आचरण ईमानदारी, कर्मठता, और अच्छी नैतिकता जैसे अनेक बातों को अंतर्ग्रस्त करता है। यह हमारे राज्यगृह के आस-पास के क्षेत्र में रहनेवाले निवासियों के प्रति आदरपूर्ण होना भी अंतर्ग्रस्त करता है। अन्य पहलुओं में हमारे ईश्वरीय आचरण को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है यदि हम अपने पड़ोसियों के प्रति लिहाज़पूर्ण होने से चूकते हैं। पौलुस ने हमसे आग्रह किया कि हमारा “चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो।”—फिलि. १:२७.
४ कभी-कभी, कुछ राज्यगृहों के नज़दीक रहनेवाले निवासियों ने शिकायत की है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें लगा कि सभाओं में उपस्थित होनेवाले लोगों ने लिहाज़ की कमी दिखायी थी। भाइयों और बहनों को राज्यगृह के आगे की फुटपाथ पर जमा होने और उत्तेजनापूर्ण वार्तालाप करने से दूर रहना चाहिए जो आस-पास के घरों में सुना जा सकता है। बच्चों को राज्यगृह के भीतर-बाहर दौड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। लापरवाही से गाड़ी के दरवाज़ों को ज़ोर से बन्द करना या स्कूटर का हॉर्न बजाना आस-पड़ोस को परेशान कर सकता है। इस प्रकार का आचरण कलीसिया की प्रतिष्ठा को घटाता है। साथ ही, यह महत्त्वपूर्ण है कि हम यातायात के सब नियमों का पालन करें।—रोमि. १३:१, २, ५.
५ पार्किंग के सम्बन्ध में समान समस्याएँ रिपोर्ट की गयी हैं। कार, स्कूटर, यहाँ तक कि साइकल भी निजी क्षेत्र में या ऐसी जगहों पर पार्क नहीं की जानी चाहिए जहाँ वे यातायात में बाधा डालें या घरों या दुकानों के प्रवेश में बाधा बनें। आस-पास के व्यवसाय प्रतिष्ठानों द्वारा अपने ग्राहकों के लिए बनाए गए पार्किंग क्षेत्रों को तब तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जब तक कि अनुमति न मिले। जहाँ तीन या चार कलीसियाएँ एक ही राज्यगृह इस्तेमाल करती हैं, वहाँ वस्तुतः सप्ताह के हर दिन सभाएँ होती हैं, और यह प्राचीनों के निकायों के बीच घनिष्ठ सहकारिता की माँग करता है।—दिसम्बर १, १९८९ की प्रहरीदुर्ग के पृष्ठ २१ पर अनुच्छेद १३ देखिए।
६ बाइबल हमें “सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये” करने का आग्रह करती है, जिसमें बाहरी व्यक्तियों के लिए लिहाज़ दिखाना सम्मिलित है। (१ कुरि. १०:३१-३३) यदि हम ‘दूसरों के हित की चिन्ता’ करते हैं, तो हम लापरवाही से उनके क्षेत्र में नहीं घुसेंगे। (फिलि. २:४) हम स्थानीय व्यापारियों की व्यावसायिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने से भी दूर रहेंगे।
७ दूसरों के लिए लिहाज़ दिखाना—दोनों, कलीसिया के अन्दर और बाहर—अपने हृदय में हम जो महसूस करते हैं उसकी बाह्य अभिव्यक्ति है। हम जो करते और कहते हैं उसे यह प्रदर्शित करना चाहिए कि हम “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम” करते हैं।—मत्ती ७:१२; २२:३९.