राज्यगृह निर्माण-कार्य की ज़रूरत के साथ तालमेल बनाए रखना
जब हम विश्वव्यापी क्षेत्र देखते हैं, तो यहोवा के पार्थिव संगठन द्वारा अनुभव की जा रही महान बढ़ोतरी को देखने से दिल ख़ुश हो जाता है। पिछले साल, केवल भारत में लगभग २५ नई कलीसियाएँ स्थापित की गईं, जबकि कुल ३,२८८ कलीसियाएँ संसार भर में शामिल की गईं। तो फिर इसमें कोई ताज्जुब नहीं कि इतनी ज़्यादा बढ़ोतरी से, अब और ज़्यादा राज्यगृहों की ज़रूरत है।
२ क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समिति: राज्यगृह निर्माण-कार्य कार्यक्रम को तेज़ी देने के लिए अब संस्था ने माध्यम के रूप में, दो क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समितियाँ नियुक्त की हैं, एक तमिलनाडु सर्किटों की कलीसियाओं की सहायता के लिए और दूसरी केरल सर्किटों की सहायता के लिए। इन क्षेत्रीय समितियों को राज्यगृह परियोजनाओं के निरीक्षण का काम सौंपा गया है, चाहे ये नए भवन हों या नवीनीकरण कार्य। राज्यगृह निर्माण-कार्य का सारा प्रबंध, आत्म-बलिदान और देने की मसीही आत्मा द्वारा निष्पन्न किया जाता है—उस आत्मा के विपरीत जो संसार में आमतौर पर दिखायी जाती है।—२ तीमु. ३:२, ४.
३ संस्था ने निर्माण-कार्य योजनाओं की जाँच करने में सहायता के लिए क्षेत्रीय समितियों को मार्गदर्शन प्रदान किए हैं। इस प्रकार, ये समितियाँ ऐसा राज्यगृह बनाने में, जो सौम्य और कार्यशील होगा और जो समर्पित संसाधनों का बुद्धिमानी से प्रयोग करेगा, स्थानीय प्राचीनों की सहायता करने के लिए सुसज्जित हैं। प्राचीनों के निकाय के लिए सभी बातों की ध्यानपूर्वक जाँच करना अच्छा होगा और क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समितियों में कार्य करने के लिए नियुक्त अनुभवी प्राचीनों के अनुभव से उन्हें पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए।—लूका १४:२८-३०.
४ निर्माण-कार्य लागत को न्यूनतम रखना: क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समितियों को किसी योग्य प्राचीन की निगरानी में स्थानीय कलीसिया के लिए एक पर्चेसिंग डिपार्टमेंट संगठित करने का निर्देश दिया गया है। इस डिपार्टमेंट में कार्य कर रहे भाई उपलब्ध क़ीमतों का यत्नपूर्वक मुआयना करते हैं ताकि वे अलग-अलग ख़रीदारी क़ीमतों और परस्पर मोल-तोल के माध्यम से किफ़ायती दामों का पता लगा सकें। इस तरीक़े से, यह निर्णय लिया जा सकता है कि किस सप्लायर का इस्तेमाल करना चाहिए और कौन-सा माल ख़रीदना चाहिए।
५ कुछ कलीसियाओं को अपनी राज्यगृह निर्माण-कार्य परियोजना को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की ज़रूरत होती है। संस्था से एडवांस लेने की माँग करने से पहले, प्राचीनों को एक स्थानीय सर्वे करना चाहिए इन बातों को निश्चित करने के लिए कि (१) ऐसी भूसंपत्ति की ख़रीद में, जो वर्तमान ज़रूरत को पूरा करने साथ ही भावी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो और निर्माण-कार्य ख़र्चों को उठाने में सहायता के लिए शुरूआत में कितना दान दिया जा सकेगा, (२) उस कलीसिया से संबंधित स्थानीय लोगों से कितना पैसा उधार लिया जा सकता है और (३) कलीसिया के संचालन के ख़र्चे और संस्था से लिए गए किसी भी एडवांस को लौटाने के लिए हर महीने कितना दान वापस लौटाया जा सकेगा। जब सर्वे किया जाए तो परचियों पर कोई नाम नहीं लिखा जाना चाहिए।
६ राज्यगृह नक़्शा साधारण रखिए: राज्यगृहों के मानकीकरण में सहायता देने के लिए, संस्था के पास १००, १५० और २५० लोगों के बैठने के लिए तीन मानकीकृत राज्यगृह नक़्शे उपलब्ध हैं। मित्रों या संस्था राज्यगृह निधि के साधनों में से किसी एक पर व्यर्थ बोझ डाले बिना, भविष्य में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए प्राचीन इन मूलभूत नक़्शों के आधार पर अपना चुनाव कर सकते हैं ताकि ज़रूरत को पूरा किया जा सके।
७ एक नक़्शा चुनने से पहले, कलीसिया प्राचीनों को क्षेत्रीय समिति से संपर्क करना चाहिए और संस्था द्वारा प्रदान की गई योजनाओं को, मार्गदर्शक के रूप में इस्तेमाल करते हुए भवन की समस्त संरचना पर चर्चा करनी चाहिए। जिन स्थानों में अभी तक क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समिति नियुक्त नहीं की गई है, वहाँ के प्राचीनों को राज्यगृह निर्माण-कार्य परियोजना के लिए कोई भी क़दम उठाने से पहले संस्था से संपर्क करना चाहिए।
८ स्वयंसेवक उत्तम कार्य में सहयोग देते हैं: संस्था उन अनेक स्वयंसेवकों की आभारी है, जो राज्यगृह निर्माण-कार्य में सहायता करते हैं। लेकिन, क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समितियाँ रिपोर्ट करती हैं कि और ज़्यादा स्वयंसेवकों की ज़रूरत है। राज्य हितों के समर्थन में यह एक आवश्यक सेवा है।—१ कुरि. १५:५८.
९ एक व्यक्ति कैसे स्वयंसेवक बनता है? संस्था प्राचीनों के आवेदन पर राज्यगृह निर्माण-कार्य कार्यकर्ता प्रश्नावली फ़ॉर्म उन्हें भेजती है। फिर ये फ़ॉर्म योग्य कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। उन बपतिस्मा-प्राप्त प्रकाशकों को जिनके पास उचित कौशल है और जिनका कलीसिया में अच्छा नाम है, स्वयंसेवक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। निर्माण और ग़ैर-निर्माण कौशल दोनों की ज़रूरत है। स्वयंसेवक आवश्यक फ़ॉर्म अपनी कलीसिया के प्रिसाइडिंग ओवरसियर या सचिव से ले सकते हैं। वे अपने अनुभव को उस पर लिख सकते हैं कि क्या वे एक व्यापारी हैं या किसी अन्य क्षेत्र का अनुभव रखते हैं, जैसे भोजन सेवा, सुरक्षा, माल का इस्तेमाल, लेखा-शास्त्र और कानूनी दस्तावेज़ों की कार्यवाही।
१० साथ ही, जब पास ही एक राज्यगृह निर्मित किया जा रहा हो, तो आपकी कलीसिया के उन प्रकाशकों के पास जिन्हें निर्माण कौशल नहीं आता, आम मज़दूरों के तौर पर मदद करने का अवसर हो सकता है। ये कार्यकर्ता स्वयंसेवक प्रश्नावली नहीं भरते। ज़रूरत सबको बता दी जाती है और निर्माण-कार्य परियोजना में शामिल उस कलीसिया के प्राचीनों और केवल एक समय के लिए पड़ोसी कलीसियाओं के प्राचीनों के माध्यम से प्रबंध किए जाते हैं।
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एक राज्यगृह बनाने के लिए क़दम:
(१) कलीसिया द्वारा परियोजना बनाने और एक कलीसिया ट्रस्ट बनाने के लिए ट्रस्टीस् नियुक्त करने का प्रस्ताव पास किया जाता है
(२) प्राचीनों का निकाय एक स्थानीय निर्माण-कार्य समिति नियुक्त करता है, जिसमें दो या तीन प्राचीन होते हैं, ख़ासकर जिन्हें व्यापार/निर्माण-कार्य अनुभव हो
(३) स्थानीय निर्माण-कार्य समिति राज्यगृह नक़्शे के चुनाव के लिए क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समिति से या संस्था से संपर्क करती है
(४) चुना गया नक़्शा स्वीकृति के लिए संस्था को भेजा जाता है और स्थानीय अधिकारियों के पास मंज़ूरी के लिए वापस भेज दिया जाता है
(५) प्राचीन, परियोजना के लिए उपलब्ध निधि निश्चित करते हैं। (यदि आपको आर्थिक सहायता की ज़रूरत है तो संस्था को लिखिए)
(६) स्थानीय निर्माण-कार्य समिति, अधिकांश प्रकाशकों की सहूलियत के लिए नज़दीकी भूसंपत्ति की तलाश करती, उसे प्राप्त करती और ट्रस्ट के नाम पर उसे रजिस्टर करती है
(७) क्षेत्रीय निर्माण-कार्य समिति और स्थानीय निर्माण-कार्य समिति, राज्यगृह परियोजना को पूरा करने के लिए साथ मिलकर कार्य करती हैं
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भूसंपत्ति की जाँच के लिए पड़ताल सूची
प्लाट
माप (अब और भविष्य की ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त है?)
आकार (पूरे क्षेत्र का इस्तेमाल करने में कोई कठिनाई तो नहीं?)
भूमि (क्या यह आपकी इमारत को सँभाल सकती है?)
पानी (पानी भरने का ख़तरा है? क्या सैप्टिक टैंक से पानी निकल सकेगा?)
पड़ोसी (क्या वे आपकी इमारत चाहेंगे?)
जनसुविधाएँ और सेवाएँ
उपलब्धता (सीवर, पानी, गैस, बिजली, फ़ोन)
कूड़ा-कबाड़ सफ़ाई सुविधा
पुलिस और अग्नि सुरक्षा
नियमित डाक सेवा
क्या स्कूल पास में हैं? प्रतिष्ठित हैं?
पास-पड़ोस
जीवन का स्तर (उन्नतिशील, अवनतिशील, स्थिर?)
पर्यावरण परिस्थिति (राजमार्ग, फ़ैक्ट्रियाँ?)
स्थाननिर्धारण
क्या वहाँ जन परिवहन सुविधा उपलब्ध है?
सीमाएँ
क्या आप उस ज़मीन का पूरा-पूरा हक़नामा ले सकते हैं? (एक अटार्नी से संपर्क कीजिए)
क्या उसमें डीड सीमाएँ हैं?
क्या उसमें मण्डलन सीमाएँ हैं? (दूरी रखना, आयतन)
क्या आपको भोगाधिकार और मार्गाधिकार क़ायम रखना ज़रूरी है?
वित्त व्यवस्था
क्या आप भूसंपत्ति रखने में समर्थ हैं?
क्या आपको लोन की ज़रूरत होगी
क्या इसमें अप्रत्यक्ष क़ीमतें हैं?
(ख़ास विश्लेषण, अभुक्त कर?)
आपको किस प्रकार के कर देने पड़ेंगे?
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निर्माण नियमावली द्वारा ख़ास क्षेत्रों की घेराबंदी
मण्डलन नियम
मण्डलन ज़िलों को निश्चित करना
भवनों को कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है
भवन के लिए इस्तेमाल हो सकनेवाले क्षेत्र का प्रतिशत (घनत्व)
भवन का अधिकतम आयतन
अधिकतम ऊँचाई
सड़क और पड़ोस से रखी गई दूरी
गाड़ी खड़ी करने के नियम
न्यूनतम प्लाट-माप माँगें
“प्रतिवास चिन्ह” को क़ायम रखने या बदलने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है
भवन नियमावली
अग्नि सुरक्षा
सुरक्षित निर्गम (निकास)
भवन की संभावित ख़तरनाक सुविधाओं की देखरेख करना
जनसमूह के लिए तैयार किया जाना (जन भवन)
संरचनात्मक सुरक्षा
पर्याप्त रोशनी और वायुसंचार
सफ़ाई नलसाज़ी
आग बुझानेवाले यंत्र
निर्माण-कार्य के दौरान सुरक्षा
मुख्य उद्देश्य भवन निवासियों के जीवन और हित की रक्षा करना है
[पेज 4 पर चित्र-शीर्षक]
बेकार
[पेज 4 पर चित्र-शीर्षक]
बढ़िया
[पेज 4 पर चित्र-शीर्षक]
ठीक-ठाक