पूर्वी यूरोप में सच्ची उपासना की ओर आ रहे लोगों की बढ़ती संख्या
पहली शताब्दी में मसीही बड़े जोश के साथ परमेश्वर के राज्य का संदेश सुनाते थे। इसलिए कलीसियाएँ “गिनती में प्रति दिन बढ़ती गईं।” और भाइयों की खुशी भी बढ़ती गई। (प्रेरितों 16:5) उन्होंने हिम्मत के साथ जो प्रचार किया उसकी वज़ह से एशिया, अफ्रीका और यूरोप में बहुत-से लोग मसीही बन गए और सच्ची उपासना करने लगे।
2 आज अंतिम दिनों में भी सच्ची उपासना करनेवालों की गिनती लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा पूर्वी-यूरोप के देशों में बहुत ज़्यादा हो रहा है। जिन देशों में सरकार ने सन् 1990 और उसके बाद के कुछ सालों तक, हमारे काम पर पाबंदी लगा रखी थी, आज वहाँ सच्ची उपासना करने के लिए लोग धारा की तरह चले आ रहे हैं। ऐसे ही दो देश, रूस और यूक्रेन के बारे में 1999 इयरबुक बताती है कि इनमें से हर देश में एक लाख से ज्यादा प्रचारकों ने रिपोर्ट की। भूतपूर्व सोवियत संघ के 15 इलाकों में 1991 से अब तक करीब 2,20,000 से भी ज़्यादा लोग यहोवा को समर्पित करके बपतिस्मा ले चुके हैं। साक्षियों की गिनती इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि नए-नए किंगडम हॉल और असैम्बली-हॉल बनाने ज़रूरी हो गए हैं। साथ ही ब्रांच के लिए कई ऑफिस बनाने भी ज़रूरी हो गए हैं।
3 अमरीका के मार्च 1997 की हमारी राज्य सेवकाई में यह घोषणा की गई थी कि जिन देशों में ज़्यादा किंगडम हॉल बनाने की सख्त ज़रूरत है, मगर कलीसियाओं के पास हॉल बनाने के लिए पैसे वगैरह की बहुत कमी है, अब उन कलीसियाओं को भी, ‘सोसाइटी किंगडम हॉल फंड’ से कुछ लोन दिया जाएगा। मार्च 1996 से अक्तूबर 1998 तक संस्था ने पूर्वी-यूरोप के 11 देशों की देखभाल करनेवाले ब्रांच ऑफिसों को 359 किंगडम हॉल बनाने के लिए लोन की मंज़ूरी दी। इस लोन से किंगडम हॉल के लिए ज़मीन और सामान खरीदा जा रहा है और साथ ही मौजूदा किंगडम हॉलों की मरम्मत भी की जा रही है। यहाँ दी गई तस्वीरों को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सोसाइटी किंगडम हॉल फंड के लिए अमरीका और दूसरे देशों के भाई-बहनों ने जो चंदा दिया है उससे पूर्वी-यूरोप के हमारे भाइयों को कितना फायदा हुआ है।
4 बुलगारिया में 1998 में 12 प्रतिशत की बढ़ौतरी हुई और उस साल अप्रैल में जब वहाँ पहला किंगडम हॉल बनकर तैयार हुआ तो भाइयों की खुशी का कोई ठिकाना न रहा। क्रोएशिया में 4 प्रतिशत की बढ़ौतरी हुई। वहाँ के भाई-बहन कई सारे किंगडम हॉल बनाने में लगे हुए हैं ताकि सच्ची उपासना के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लोग आ सकें। हंगरी में अब 80 किंगडम हॉल हैं जिन्हें 144 कलीसियाएँ इस्तेमाल करती हैं। इसका मतलब है कि वहाँ की कुल 235 कलीसियाओं में से 61 प्रतिशत के पास उपासना के लिए अपना किंगडम हॉल है। मसैदोनिया में किंगडम हॉल कनस्ट्रक्शन प्रोग्राम के तहत दो नए हॉल बनकर तैयार हो गए हैं और कई किंगडम हॉल बन रहे हैं। पिछले साल गर्मी के मौसम में, मसैदोनिया की राजधानी स्कोप्जे में एक ऐसा डबल किंगडम हॉल बनकर तैयार हो गया है, जिसे कम से कम 6 कलीसियाएँ इस्तेमाल कर सकती हैं।
5 और रूस के बारे में देखा जाए तो 1998 सेवा-वर्ष में वहाँ हर हफ्ते औसतन 260 लोगों ने बपतिस्मा लिया! दूसरे देशों की मिसाल पर चलते हुए रूस ब्रांच ने भी 12 रीजनल बिल्डिंग कमेटियों का इंतज़ाम किया है ताकि आगे चलकर इतने विशाल क्षेत्र में जगह-जगह किंगडम हॉल बनाए जा सकें। सैंट. पिटर्सबर्ग के उत्तरी भाग में देश का पहला असैम्बली-हॉल बनाने का काम चल रहा है, इसमें 1,600 लोग आराम से बैठ सकेंगे। इसके अलावा पाँच ऐसे किंगडम हॉल बनाए जाएँगे जिनमें से हरेक में 200 लोग बैठ सकेंगे। यूक्रेन में भाई-बहनों और सच्चाई सीखनेवालों की आध्यात्मिक ज़रूरत को पूरा करने के लिए 84 किंगडम हॉल बनकर पूरे हो चुके हैं, और 80 का काम अभी चालू है।
6 पूर्वी-यूरोप में हो रही इस शानदार बढ़ौतरी से क्या हमारा रोम-रोम खुशी से भर नहीं जाता? हम दुनिया के चाहे किसी भी कोने में रहते हों, सच्ची उपासना की ओर आ रहे लोगों की बढ़ती संख्या हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर पक्षपाती नहीं है, साथ ही वह धीरज धरता है ताकि एक “बड़ी भीड़” उद्धार पा सके। (प्रका. 7:9; 2 पत. 3:9) यह हमारे लिए कितने सम्मान की बात है कि दूसरों की आध्यात्मिक तरक्की में हमारा भी एक छोटा-सा हिस्सा है! नीतिवचन 28:27 हमें विश्वास दिलाता है कि “जो निर्धन को दान देता है उसे घटी नहीं होती।” निर्माण-कार्य का खर्च पूरा करने के लिए हम दिल खोलकर जो देते हैं उससे भौतिक चीज़ों की “बराबरी” हो जाती है। इससे दुनियाभर में सच्ची उपासना की ओर आ रहे लोगों की बढ़ती संख्या को देखकर हम सभी को बहुत खुशी मिलती है। ऐसी खुशी जो सिर्फ देने से आती है।—2 कुरि. 8:14, 15; प्रेरि. 20:35.
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सासीले, रोमानिया
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मारडू, इस्टोनिया
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सेवनिका, स्लोविनिया
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तीसज़ावअसवरी, हंगरी
[पेज 4 पर तसवीरें]
ज़ुरमाला, लैटविया
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तालइन, इस्टोनिया
[पेज 4, 5 पर तसवीर]
ताऊरेंज, लिथुआनिया
[पेज 4, 5 पर तसवीर]
बैलग्रेड, यूगोस्लाविया
[पेज 5 पर तसवीरें]
प्राइविदज़ा, स्लोवाकिया
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मेतेज़लका, हंगरी
[पेज 6 पर तसवीरें]
रूमा, यूगोस्लाविया
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वारनॉ नद तोपलउ, स्लोवाकिया
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तोरनकलनस, लैटविया