पत्रिकाएँ पेश करने के लिए क्या कहना चाहिए
प्रहरीदुर्ग जनवरी से मार्च
“बहुतों को लगता है कि पैसे से सच्ची खुशी मिलती है। इस बारे में आपकी क्या राय है? [जवाब के लिए रुकिए।] क्या मैं आपको शास्त्र से कुछ पढ़कर बता सकता हूँ? यह शास्त्र हज़ारों सालों पहले लिखा गया था और यह एकदम सच बताता है। [अगर घर-मालिक हाँ कहता है, तो 1 तीमुथियुस 6:9,10 पढ़िए।] यह पत्रिका समझाती है कि धन-दौलत से क्यों खुशी नहीं मिल सकती और धन-दौलत का होना क्यों परमेश्वर की मंज़ूरी की निशानी नहीं है।”
सजग होइए! जनवरी से मार्च
“सभी शादीशुदा जोड़ों के बीच कभी-न-कभी मनमुटाव ज़रूर होता है। आपको क्या लगता है कि इन झगड़ों को कैसे सुलझाया जा सकता है? [जवाब के लिए रुकिए।] क्या मैं आपको एक प्राचीन किताब से मनमुटाव दूर करने का राज़ दिखा सकता हूँ? [अगर घर-मालिक दिलचस्पी दिखाता है, तो इफिसियों 4:31,32 पढ़िए।] यह पत्रिका पारिवारिक ज़िंदगी के बारे में काफी कारगर सलाह देती है।” पेज 6 पर दिया लेख दिखाइए।
प्रहरीदुर्ग अप्रैल से जून
“जब लोगों को इतिहास की सबसे महान हस्तियों में से किसी एक को चुनने के लिए कहा जाता है, तो कई लोग यीशु को चुनते हैं। क्या आप भी यीशु को चुनेंगे? [जवाब के लिए रुकिए।] गौर कीजिए कि यीशु के बारे में इतनी सारी अलग-अलग राय के चलते क्यों उसके बारे में सच्चाई जाना ज़रूरी है। [यहून्ना 17:3 पढ़िए।] प्रहरीदुर्ग पत्रिका का यह खास अंक दिखाता है कि बाइबल असल में यीशु और उसकी शिक्षाओं के बारे में क्या बताती है।”
सजग होइए! अप्रैल से जून
“हम सभी भेदभाव के शिकार रह चुके हैं। आपको क्या लगता है, परमेश्वर भेदभाव के बारे में कैसा महसूस करता है? [जवाब के लिए रुकिए। फिर घर-मालिक से आयत पढ़ने की इज़ाज़त लीजिए और अगर वह हाँ कहता है, तो प्रेषितों 10:34,35 पढ़िए।] यह पत्रिका बताती है कि हम भेदभाव का सामना कैसे कर सकते हैं। साथ ही, अगर हमारे मन में ज़रा-सी भी भेदभाव की भावना है, तो इसमें ऐसे सिद्धांतों पर चर्चा की गयी है जो हमें इसे जड़ से उखाड़ने में मदद कर सकते हैं।”