पत्रिकाएँ पेश करने के लिए क्या कहना चाहिए
प्रहरीदुर्ग जनवरी से मार्च
“आज बहुत-से लोग बुरे काम करते हैं। क्या आपको लगता है कि कभी ऐसा वक्त आएगा जब अत्याचार और अन्याय नहीं रहेगा? [जवाब के लिए रुकिए।] परमेश्वर ने वादा किया है कि वह अन्याय और ज़ुल्म सहनेवालों की मदद करेगा। क्या मैं आपको यह वादा पढ़कर बता सकता हूँ? [अगर घर-मालिक दिलचस्पी दिखाता है तो भजन 72:12, 14 पढ़िए।] यह पत्रिका बताएगी कि लोग बुरे काम क्यों करते हैं और कैसे इनका अंत होगा।”
सजग होइए! जनवरी से मार्च
“क्या आपको लगता है कि बातचीत के लिए बनाए गए आज के उपकरण जैसे मोबाइल फोन, ई-मेल या चैट रूम, लोगों को अपना अकेलापन दूर करने में मदद देते हैं या वे और अकेले पड़ गए हैं? [जवाब के लिए रुकिए।] क्या मैं आपके लिए एक सुझाव पढ़ सकता हूँ, जो अकेलेपन से लड़ने में हमारी मदद करेगा। [अगर घर-मालिक राज़ी होता है तो प्रेषितों 20:35 पढ़ा जा सकता है।] यह पत्रिका इस बारे में कुछ और सुझाव देती है।” [फिर लेख, नौजवान पूछते हैं, कैसे अपनी उदासी पर काबू पाऊँ? दिखाया जा सकता है।]
प्रहरीदुर्ग अप्रैल से जून
“कई लोग सोचते हैं कि हम जो दुख-तकलीफें झेलते हैं, क्या उससे परमेश्वर को कोई फर्क पड़ता है? आपका क्या मानना है? [जवाब के लिए रुकिए।] क्या मैं आपको दिखा सकता हूँ कि इस बारे में पवित्र शास्त्र हमें क्या भरोसा दिलाता है? [अगर घर-मालिक राज़ी होता है तो भजन 34:18 पढ़िए।] पेज 19 पर दिया गया यह लेख दिखाता है कि जब हम खुद को नाकारा समझते हैं, हद-से-ज़्यादा दुखी हो जाते हैं या किसी गलती के लिए खुद को बहुत ज़्यादा दोषी ठहराते हैं तब परमेश्वर किस तरह हमें ऐसे खयालों से उबरने में मदद देता है।”
सजग होइए! अप्रैल से जून
“परमेश्वर के नाम पर ऐसे बुरे-बुरे काम किए गए हैं कि लोग कहते हैं, यह दुनिया धर्म के बिना ही बेहतर होती। इस बारे में आपका क्या खयाल है? [जवाब के लिए रुकिए।] क्या मैं आपको एक ऐसे गुण के बारे में बता सकता हूँ, जिसे अपनाने से दूसरों को खुशी मिलेगी और परमेश्वर भी हमारी उपासना कबूल करेगा? [यूहन्ना 13:34, 35 पढ़िए।] इस पत्रिका में यही बात खुलकर समझायी गयी है।”